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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 · श्लोक 19

अध्याय 18 · श्लोक 19

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

ज्ञानं कर्म च कर्ता च त्रिधैव गुणभेदतः। प्रोच्यते गुणसंख्याने यथावच्छृणु तान्यपि॥१९॥

jñānaṃ karma ca kartā ca tridhaiva guṇa-bhedataḥ | procyate guṇa-saṅkhyāne yathāvac chṛṇu tāny api ||19||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

ज्ञानम्: knowledge; कर्म: action; च: and; कर्ता: doer; च: and; त्रिधा: threefold; एव: indeed; गुण-भेदतः: according to the differentiation of the gunas; प्रोच्यते: is spoken; गुण-संख्याने: in the science of the gunas; यथावत्: as they are; शृणु: hear; तानि: them; अपि: also.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

गुणों के भेद से ज्ञान, कर्म और कर्ता भी तीन प्रकार के कहे गए हैं। गुणसंख्यान (सांख्यशास्त्र) में यथार्थ रूप से उन्हें भी सुन।

English Translation

Knowledge, action, and the doer are declared to be of three kinds according to the differentiation of the gunas in the science of the gunas. Hear them also as they are.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

अब भगवान् गुणों के अनुसार ज्ञान, कर्म और कर्ता के तीन-तीन प्रकार बताने जा रहे हैं। यह वर्गीकरण साधक को अपने स्वभाव को पहचानने और उसे शुद्ध करने में सहायता करता है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।