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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 · श्लोक 18

अध्याय 18 · श्लोक 18

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

ज्ञानं ज्ञेयं परिज्ञाता त्रिविधा कर्मचोदना। करणं कर्म कर्तेति त्रिविधः कर्मसंग्रहः॥१८॥

jñānaṃ jñeyaṃ parijñātā tri-vidhā karma-codanā | karaṇaṃ karma karteti tri-vidhaḥ karma-saṅgrahaḥ ||18||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

ज्ञानम्: knowledge; ज्ञेयम्: the object of knowledge; परिज्ञाता: the knower; त्रि-विधा: threefold; कर्म-चोदना: impetus to action; करणम्: instrument; कर्म: action; कर्ता: doer; इति: thus; त्रि-विधः: threefold; कर्म-संग्रहः: compendium of action.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

ज्ञान, ज्ञेय और ज्ञाता – ये तीन प्रकार की कर्मप्रेरणा हैं। करण, कर्म और कर्ता – ये तीन प्रकार का कर्मसंग्रह (कर्म का समूह) है।

English Translation

Knowledge, the object of knowledge, and the knower – these three constitute the impetus to action. The instrument, the action, and the doer – these are the threefold basis of action.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

इस श्लोक में कर्म के दो त्रिविध वर्ग बताए गए हैं। पहला: ज्ञान, ज्ञेय, ज्ञाता – ये कर्म की प्रेरणा के स्रोत हैं। दूसरा: करण (इन्द्रियाँ), कर्म (क्रिया), कर्ता – ये कर्म के अंग हैं। यह वर्गीकरण कर्म के स्वरूप को समझने में सहायक है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।