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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 18 · श्लोक 14

अध्याय 18 · श्लोक 14

मोक्ष संन्यास योग (Moksha Sannyaasa Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

अधिष्ठानं तथा कर्ता करणं च पृथग्विधम्। विविधाश्च पृथक्चेष्टा दैवं चैवात्र पञ्चमम्॥१४॥

adhiṣṭhānaṃ tathā kartā karaṇaṃ ca pṛthag-vidham | vividhāś ca pṛthak ceṣṭā daivaṃ caivātra pañcamam ||14||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

अधिष्ठानम्: the seat (body); तथा: also; कर्ता: the doer; करणम्: instruments; च: and; पृथक्-विधम्: various; विविधाः: various; च: and; पृथक्: separate; चेष्टाः: efforts; दैवम्: the divine (destiny); च: and; एव: indeed; अत्र: here; पञ्चमम्: the fifth.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

अधिष्ठान (शरीर), कर्ता, विविध प्रकार की इन्द्रियाँ, पृथक-पृथक चेष्टाएँ तथा पाँचवाँ दैव – ये (पाँच कारण) हैं।

English Translation

The seat (body), the doer, the various instruments, the many kinds of efforts, and finally the divine destiny – these are the five causes.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

यहाँ पाँच कारण बताए गए हैं: १. शरीर (अधिष्ठान), २. कर्ता (जीव जो अहंकार से युक्त है), ३. करण (इन्द्रियाँ), ४. विविध चेष्टाएँ (प्राण आदि की क्रियाएँ), ५. दैव (अदृष्ट या पूर्वकर्म)।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।