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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 17 · श्लोक 9

अध्याय 17 · श्लोक 9

श्रद्धात्रय विभाग योग (Sraddhatraya Vibhaga Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

कट्वम्ललवणात्युष्णतीक्ष्णरूक्षविदाहिनः। आहारा राजसस्येष्टा दुःखशोकामयप्रदाः॥९॥

kaṭv-amla-lavaṇāty-uṣṇa-tīkṣṇa-rūkṣa-vidāhinaḥ | āhārā rājasasyeṣṭā duḥkha-śokāmaya-pradāḥ ||9||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

कटु: bitter; अम्ल: sour; लवण: salty; अत्युष्ण: very hot; तीक्ष्ण: pungent; रूक्ष: dry; विदाहिनः: burning; आहाराः: foods; राजसस्य: of the rajasic; इष्टाः: dear; दुःख: pain; शोक: grief; आमय: disease; प्रदाः: causing.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

कड़वे, खट्टे, नमकीन, अत्यधिक गरम, तीखे, रूखे और जलन पैदा करने वाले आहार राजस पुरुषों को प्रिय होते हैं, जो दुःख, शोक और रोग उत्पन्न करने वाले होते हैं।

English Translation

Foods that are bitter, sour, salty, very hot, pungent, dry, and burning, producing pain, grief, and disease, are dear to the rajasic.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

राजस आहार अत्यधिक तीव्र स्वाद वाला, उत्तेजक और असन्तुलित होता है। यह शरीर और मन में अशान्ति, रोग और दुःख उत्पन्न करता है। Rajasic food is excessively spicy, sour, salty, hot, and dry, leading to discomfort, grief, and disease. It agitates the mind and body.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।