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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 17 · श्लोक 8

अध्याय 17 · श्लोक 8

श्रद्धात्रय विभाग योग (Sraddhatraya Vibhaga Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

आयुःसत्त्वबलारोग्यसुखप्रीतिविवर्धनाः। रस्याः स्निग्धाः स्थिरा हृद्या आहाराः सात्त्विकप्रियाः॥८॥

āyuḥ-sattva-balārogya-sukha-prīti-vivardhanāḥ | rasyāḥ snigdhāḥ sthirā hṛdyā āhārāḥ sāttvika-priyāḥ ||8||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

आयुः: life; सत्त्व: strength of mind; बल: strength; आरोग्य: health; सुख: happiness; प्रीति: cheerfulness; विवर्धनाः: promoting; रस्याः: juicy; स्निग्धाः: oily; स्थिराः: substantial; हृद्याः: agreeable; आहाराः: foods; सात्त्विकप्रियाः: dear to the sattvic.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

जो आहार आयु, बुद्धि (सत्त्व), बल, आरोग्य, सुख और प्रीति को बढ़ाने वाले हों, रसयुक्त, चिकने, स्थिर और हृदय को अच्छे लगने वाले हों – ऐसे आहार सात्त्विक पुरुषों को प्रिय होते हैं।

English Translation

Foods that promote longevity, mental strength, vigor, health, happiness, and cheerfulness, which are juicy, oily, substantial, and agreeable – are dear to the sattvic people.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

सात्त्विक आहार के लक्षण बताए गए हैं: यह शरीर और मन दोनों के लिए पौष्टिक, संतुलित और आनंददायक होता है। यह व्यक्ति की दीर्घायु, मानसिक शक्ति और प्रसन्नता में वृद्धि करता है। Sattvic food is described as that which nourishes both body and mind, increasing longevity, strength, health, and happiness. It is juicy, oily, firm, and pleasing.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।