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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 17 · श्लोक 7

अध्याय 17 · श्लोक 7

श्रद्धात्रय विभाग योग (Sraddhatraya Vibhaga Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

आहारस्त्वपि सर्वस्य त्रिविधो भवति प्रियः। यज्ञस्तपस्तथा दानं तेषां भेदमिमं शृणु॥७॥

āhāras tv api sarvasya tri-vidho bhavati priyaḥ | yajñas tapas tathā dānaṁ teṣāṁ bhedam imaṁ śṛṇu ||7||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

आहार: food; तु: indeed; अपि: also; सर्वस्य: of all; त्रिविध: threefold; भवति: is; प्रियः: dear; यज्ञ: sacrifice; तप: austerity; तथा: and; दानम्: charity; तेषाम्: of them; भेदम्: the distinction; इमम्: this; शृणु: hear.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

प्रत्येक व्यक्ति को प्रिय आहार भी तीन प्रकार का होता है, तथा यज्ञ, तप और दान भी तीन प्रकार के होते हैं। उनके इस भेद को सुनो।

English Translation

The food which is dear to each is also threefold, as also sacrifice, austerity, and charity. Hear the distinction of these.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

अब भगवान् आहार, यज्ञ, तप और दान – इन चार मूलभूत क्रियाओं को तीन गुणों के आधार पर वर्गीकृत करने के लिए कहते हैं। यह वर्गीकरण व्यक्ति की श्रद्धा और स्वभाव को समझने में सहायक है। Now the Lord classifies food, sacrifice, austerity, and charity according to the three gunas, helping us understand how one's faith expresses in daily activities.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।