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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 17 · श्लोक 10

अध्याय 17 · श्लोक 10

श्रद्धात्रय विभाग योग (Sraddhatraya Vibhaga Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

यातयामं गतरसं पूति पर्युषितं च यत्। उच्छिष्टमपि चामेध्यं भोजनं तामसप्रियम्॥१०॥

yāta-yāmaṁ gata-rasaṁ pūti paryuṣitaṁ ca yat | ucchiṣṭam api cāmedhyaṁ bhojanaṁ tāmasa-priyam ||10||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

यातयामम्: cooked (and kept) stale; गतरसम्: tasteless; पूति: putrid; पर्युषितम्: spoiled; च: and; यत्: which; उच्छिष्टम्: leavings; अपि: also; च: and; अमेध्यम्: impure; भोजनम्: food; तामसप्रियम्: dear to the tamasic.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

जो भोजन पका हुआ (और बासी) हो, रसहीन हो, दुर्गन्धित हो, सड़ा हुआ हो, जूठा हो और अपवित्र हो – वह तामस पुरुषों को प्रिय होता है।

English Translation

Food that is stale, tasteless, putrid, spoiled, impure, and left over (by others) is dear to the tamasic.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

तामस आहार वह है जो गुणहीन, सड़ा-गला, अपवित्र या त्यागा हुआ हो। यह शरीर और मन को निष्क्रिय, सुस्त और अशुद्ध करता है। Tamasic food is that which is stale, tasteless, decayed, impure, and left over. It promotes dullness, inertia, and impurity.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।