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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 17 · श्लोक 5

अध्याय 17 · श्लोक 5

श्रद्धात्रय विभाग योग (Sraddhatraya Vibhaga Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

अशास्त्रविहितं घोरं तप्यन्ते ये तपो जनाः। दम्भाहङ्कारसंयुक्ताः कामरागबलान्विताः॥५॥

aśāstra-vihitaṁ ghoraṁ tapyante ye tapo janāḥ | dambhāhaṅkāra-saṁyuktāḥ kāma-rāga-balānvitāḥ ||5||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

अशास्त्रविहितम्: not prescribed by the scriptures; घोरम्: severe; तप्यन्ते: perform; ये: those who; तपः: austerity; जनाः: persons; दम्भाहङ्कारसंयुक्ताः: filled with hypocrisy and egoism; कामरागबलान्विताः: possessed by the force of desire and attachment.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

जो लोग दम्भ और अहंकार से युक्त होकर, कामना, आसक्ति और बल (हठ) से प्रेरित होकर, शास्त्रों द्वारा अविहित घोर तप करते हैं,

English Translation

Those who practice severe austerities not enjoined by the scriptures, filled with hypocrisy and egoism, and impelled by the force of desire and attachment,

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

यह श्लोक उन लोगों का वर्णन करता है जो शास्त्रीय मार्ग को छोड़कर अपनी इच्छाओं और अहंकार के वशीभूत होकर कठोर तपस्या करते हैं। ऐसी तपस्या अक्सर दूसरों को दिखाने या अपने बल के प्रदर्शन के लिए होती है। This verse describes those who perform severe austerities not sanctioned by scriptures, driven by hypocrisy, ego, desire, and attachment.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।