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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 17 · श्लोक 26

अध्याय 17 · श्लोक 26

श्रद्धात्रय विभाग योग (Sraddhatraya Vibhaga Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

सद्भावे साधुभावे च सदित्येतत्प्रयुज्यते। प्रशस्ते कर्मणि तथा सच्छब्दः पार्थ युज्यते॥२६॥

sad-bhāve sādhu-bhāve ca sad ity etat prayujyate | praśaste karmaṇi tathā sac-chabdaḥ pārtha yujyate ||26||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

सद्भावे: in the sense of existence; साधुभावे: in the sense of goodness; च: and; सत्: Sat; इति: thus; एतत्: this; प्रयुज्यते: is used; प्रशस्ते: in auspicious; कर्मणि: action; तथा: also; सत्-शब्दः: the word Sat; पार्थ: O Partha; युज्यते: is used.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

सत् शब्द का प्रयोग सद्भाव (वस्तु की सत्ता) और साधुभाव (उत्तमता) के अर्थ में होता है। तथा हे पार्थ! प्रशस्त (शुभ) कर्म में भी सत् शब्द का प्रयोग किया जाता है।

English Translation

The word Sat is used in the sense of reality and goodness; and also, O Partha, the word Sat is used in the sense of an auspicious act.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

अब "सत्" शब्द के अर्थ बताए गए हैं – यह सत्ता (विद्यमानता) और साधुता (अच्छाई) का वाचक है। शुभ कर्मों को भी "सत्" कहा जाता है, क्योंकि वे सत् (सत्य/कल्याण) की ओर ले जाते हैं। The word "Sat" signifies existence (reality) and goodness. It is also used in the context of auspicious actions, indicating that they are true and beneficial.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।