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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 17 · श्लोक 23

अध्याय 17 · श्लोक 23

श्रद्धात्रय विभाग योग (Sraddhatraya Vibhaga Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

ॐतत्सदिति निर्देशो ब्रह्मणस्त्रिविधः स्मृतः। ब्राह्मणास्तेन वेदाश्च यज्ञाश्च विहिताः पुरा॥२३॥

oṃ tat sad iti nirdeśo brahmaṇas tri-vidhaḥ smṛtaḥ | brāhmaṇās tena vedāś ca yajñāś ca vihitāḥ purā ||23||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

ॐ: Om; तत्: Tat; सत्: Sat; इति: thus; निर्देश: designations; ब्रह्मण: of Brahman (the Supreme); त्रिविध: threefold; स्मृतः: are considered; ब्राह्मणा: the Brahmins; तेन: by that; वेदाः: the Vedas; च: and; यज्ञाः: sacrifices; च: and; विहिताः: were created; पुरा: in ancient times.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

ॐ, तत्, सत् – यह ब्रह्म (परमात्मा) का तीन प्रकार से निर्देश (नाम) कहा गया है। इसी (तीन नामों) द्वारा प्राचीन काल में ब्राह्मण, वेद और यज्ञ रचे गए।

English Translation

Om Tat Sat – this has been declared as the threefold designation of Brahman. By that were created, in ancient times, the Brahmins, the Vedas, and the sacrifices.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

यह श्लोक "ॐ तत् सत्" के महत्व को बताता है। ये तीनों शब्द परब्रह्म के विभिन्न पहलुओं के सूचक हैं। इन्हीं के माध्यम से सृष्टि के आरम्भ में ब्राह्मण, वेद और यज्ञ प्रकट हुए। The verse introduces the threefold designation of Brahman: Om, Tat, Sat. These sacred syllables represent the Supreme and were used in the creation of the Brahmins, the Vedas, and the sacrifices.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।