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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 17 · श्लोक 22

अध्याय 17 · श्लोक 22

श्रद्धात्रय विभाग योग (Sraddhatraya Vibhaga Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

अदेशकाले यद्दानमपात्रेभ्यश्च दीयते। असत्कृतमवज्ञातं तत्तामसमुदाहृतम्॥२२॥

adeśa-kāle yad dānam apātrebhyaś ca dīyate | asatkṛtam avajñātaṁ tat tāmasam udāhṛtam ||22||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

अदेशकाले: at improper place and time; यत्: which; दानम्: charity; अपात्रेभ्य: to unworthy persons; च: and; दीयते: is given; असत्कृतम्: without respect; अवज्ञातम्: with contempt; तत्: that; तामसम्: tamasic; उदाहृतम्: is declared.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

जो दान अनुचित देश-काल में, अपात्रों को, बिना सत्कार के और तिरस्कारपूर्वक दिया जाता है – वह तामस कहा गया है।

English Translation

That gift which is given at an improper place and time, to unworthy persons, without respect and with contempt – is declared tamasic.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

तामस दान वह है जो अनुचित स्थान-समय पर, अयोग्य व्यक्ति को, बिना किसी सम्मान के और उपेक्षा या तिरस्कार के भाव से दिया जाता है। Tamasic charity is given at the wrong place and time, to unworthy persons, without respect, and with disdain. It is impure and harmful.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।