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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 17 · श्लोक 24

अध्याय 17 · श्लोक 24

श्रद्धात्रय विभाग योग (Sraddhatraya Vibhaga Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

तस्मादोमित्युदाहृत्य यज्ञदानतपःक्रियाः। प्रवर्तन्ते विधानोक्ताः सततं ब्रह्मवादिनाम्॥२४॥

tasmād om ity udāhṛtya yajña-dāna-tapaḥ-kriyāḥ | pravartante vidhānoktāḥ satataṁ brahma-vādinām ||24||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

तस्मात्: therefore; ॐ: Om; इति: thus; उदाहृत्य: uttering; यज्ञ: sacrifice; दान: charity; तपः: austerity; क्रियाः: acts; प्रवर्तन्ते: begin; विधानोक्ता: as prescribed in the scriptures; सततम्: always; ब्रह्मवादिनाम्: of the followers of the Vedas.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

इसलिए, वेदों के अनुयायी (ब्रह्मवादी) लोग शास्त्र-विधि से नियत यज्ञ, दान और तप की क्रियाओं को "ॐ" का उच्चारण करके ही आरम्भ करते हैं।

English Translation

Therefore, acts of sacrifice, charity, and austerity, as prescribed in the scriptures, are always begun by the followers of the Vedas after uttering Om.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

यज्ञ, दान और तप – ये तीनों क्रियाएँ जब वैदिक विधि से की जाती हैं, तो उनका आरम्भ "ॐ" के उच्चारण से होता है। यह ईश्वर को स्मरण करने और कर्म को पवित्र करने का तरीका है। Acts of sacrifice, charity, and austerity, when performed according to scriptural injunctions, are commenced by uttering "Om", invoking the divine presence.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।