आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:२९ PM | सूर्यास्त: ०५:३३ AM
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 17 · श्लोक 20

अध्याय 17 · श्लोक 20

श्रद्धात्रय विभाग योग (Sraddhatraya Vibhaga Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

दातव्यमिति यद्दानं दीयतेऽनुपकारिणे। देशे काले च पात्रे च तद्दानं सात्त्विकं स्मृतम्॥२०॥

dātavyam iti yad dānaṁ dīyate ’nupakāriṇe | deśe kāle ca pātre ca tad dānaṁ sāttvikaṁ smṛtam ||20||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

दातव्यम्: fit to be given; इति: thus; यत्: which; दानम्: charity; दीयते: is given; अनुपकारिणे: to one who does no service in return; देशे: at the proper place; काले: at the proper time; च: and; पात्रे: to a worthy person; च: and; तत्: that; दानम्: charity; सात्त्विकम्: sattvic; स्मृतम्: is considered.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

जो दान उपकार की आशा बिना, केवल "देना कर्तव्य है" ऐसे भाव से, उचित देश, काल और पात्र को दिया जाता है – वह दान सात्त्विक कहा गया है।

English Translation

That gift which is given to one who does nothing in return, with the feeling that it is one's duty to give, at the right place and time, and to a worthy person – that charity is considered sattvic.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

सात्त्विक दान वह है जो बिना किसी प्रत्युपकार की इच्छा के, केवल कर्तव्य समझकर, उचित स्थान, समय और पात्र (योग्य व्यक्ति) को दिया जाता है। Sattvic charity is given without any expectation of return, with a sense of duty, at the proper place and time, and to a worthy recipient.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।