आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:२९ PM | सूर्यास्त: ०५:३३ AM
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 17 · श्लोक 19

अध्याय 17 · श्लोक 19

श्रद्धात्रय विभाग योग (Sraddhatraya Vibhaga Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

मूढग्राहेणात्मनो यत्पीडया क्रियते तपः। परस्योत्सादनार्थं वा तत्तामसमुदाहृतम्॥१९॥

mūḍha-grāheṇātmano yat pīḍayā kriyate tapaḥ | parasyotsādanārthaṁ vā tat tāmasam udāhṛtam ||19||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

मूढग्राहेण: with foolish effort; आत्मन: self; यत्: which; पीडया: by torturing; क्रियते: is performed; तप: austerity; परस्य: of others; उत्सादनार्थम्: for the purpose of causing injury; वा: or; तत्: that; तामसम्: tamasic; उदाहृतम्: is declared.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

जो तप मूढ़ ग्रह (मूर्खतापूर्ण आग्रह) से, अपनी पीड़ा (शरीर को कष्ट देकर) किया जाता है, अथवा दूसरों का विनाश करने के उद्देश्य से – वह तामस कहा गया है।

English Translation

That austerity which is performed out of foolishness, with self-torture, or for the purpose of destroying another – is declared tamasic.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

तामस तप वह है जो अज्ञान और मूर्खतापूर्ण हठ से किया जाता है, जिसमें स्वयं को या दूसरों को कष्ट देना शामिल होता है। यह किसी आध्यात्मिक उद्देश्य से न होकर हिंसा या विनाश की भावना से प्रेरित होता है। Tamasic austerity is performed out of foolish stubbornness, involving self-torture, or with the intention of harming others. It is devoid of wisdom and leads to suffering.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।