आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:२९ PM | सूर्यास्त: ०५:३३ AM
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 17 · श्लोक 17

अध्याय 17 · श्लोक 17

श्रद्धात्रय विभाग योग (Sraddhatraya Vibhaga Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

श्रद्धया परया तप्तं तपस्त्रिविधं नरैः। अफलाकाङ्क्षिभिर्युक्तैः सात्त्विकं परिचक्षते॥१७॥

śraddhayā parayā taptaṁ tapas tri-vidhaṁ naraiḥ | aphalākāṅkṣibhir yuktaiḥ sāttvikaṁ paricakṣate ||17||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

श्रद्धया: with faith; परया: supreme; तप्तम्: practiced; तप: austerity; त्रिविधम्: threefold; नरैः: by men; अफलाकाङ्क्षिभि: by those without desire for fruit; युक्तैः: steadfast; सात्त्विकम्: sattvic; परिचक्षते: is declared.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

इस प्रकार तीन प्रकार का तप, जो श्रद्धापूर्वक, फल की इच्छा न रखने वाले और युक्त (एकाग्र) पुरुषों द्वारा किया जाता है – वह सात्त्विक कहा जाता है।

English Translation

This threefold austerity, practiced by steadfast men with supreme faith, without desire for fruit – is declared sattvic.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

अब भगवान् बताते हैं कि पूर्वोक्त तीन प्रकार के तप (शारीरिक, वाचिक, मानसिक) जब परम श्रद्धा से, बिना फल की इच्छा के और योग्यतापूर्वक किए जाते हैं, तो वे सात्त्विक होते हैं। The threefold austerity (physical, verbal, mental) when performed with supreme faith, without desire for results, and with steadfastness, is declared sattvic.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।