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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 17 · श्लोक 16

अध्याय 17 · श्लोक 16

श्रद्धात्रय विभाग योग (Sraddhatraya Vibhaga Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

मनःप्रसादः सौम्यत्वं मौनमात्मविनिग्रहः। भावसंशुद्धिरित्येतत्तपो मानसमुच्यते॥१६॥

manaḥ-prasādaḥ saumyatvaṁ maunam ātma-vinigrahaḥ | bhāva-saṁśuddhir ity etat tapo mānasam ucyate ||16||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

मनःप्रसाद: cheerfulness of mind; सौम्यत्वम्: gentleness; मौनम्: silence (thought control); आत्मविनिग्रह: self-control; भावसंशुद्धि: purity of thought; इति: thus; एतत्: this; तप: austerity; मानसम्: mental; उच्यते: is said.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

मन की प्रसन्नता, सौम्यता, मौन, आत्म-निग्रह (मन को वश में रखना) और भावों (विचारों) की पवित्रता – यह मानसिक तप कहा जाता है।

English Translation

Cheerfulness of mind, gentleness, silence, self-control, and purity of thought – these are called mental austerity.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

मानसिक तप में मन की प्रसन्नता, कोमलता, मौन (अनावश्यक चिन्तन से मुक्ति), आत्म-संयम और विचारों की शुद्धता शामिल है। यह आन्तरिक अनुशासन है। Mental austerity includes serenity of mind, gentleness, silence, self-restraint, and purity of thoughts. It is the inner discipline of one's thoughts and emotions.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।