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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 17 · श्लोक 13

अध्याय 17 · श्लोक 13

श्रद्धात्रय विभाग योग (Sraddhatraya Vibhaga Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

विधिहीनमसृष्टान्नं मन्त्रहीनमदक्षिणम्। श्रद्धाविरहितं यज्ञं तामसं परिचक्षते॥१३॥

vidhi-hīnam asṛṣṭānnaṁ mantra-hīnam adakṣiṇam | śraddhā-virahitaṁ yajñaṁ tāmasaṁ paricakṣate ||13||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

विधिहीनम्: devoid of scriptural direction; असृष्टान्नम्: without distribution of food; मन्त्रहीनम्: devoid of mantras; अदक्षिणम्: without gifts (fees) to priests; श्रद्धाविरहितम्: devoid of faith; यज्ञम्: sacrifice; तामसम्: tamasic; परिचक्षते: declare.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

जो यज्ञ विधि-हीन हो, बिना अन्न-वितरण का हो, मन्त्र-हीन हो, बिना दक्षिणा का हो और श्रद्धा-रहित हो – वह तामस कहा जाता है।

English Translation

That sacrifice which is devoid of scriptural direction, in which no food is distributed, which is devoid of mantras and gifts to priests, and which is devoid of faith – is declared as tamasic.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

तामस यज्ञ शास्त्रीय विधि, मन्त्र, श्रद्धा, दक्षिणा और अन्न-वितरण से रहित होता है। यह केवल नाममात्र का होता है, बिना किसी वास्तविक भाव या नियम के। A tamasic sacrifice is performed without following the scriptures, without mantras, without charity, without distribution of food, and without faith. It is merely a show, devoid of spiritual substance.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।