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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 14 · श्लोक 9

अध्याय 14 · श्लोक 9

गुणत्रय विभाग योग (Gunatraya Vibhaga Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

सत्त्वं सुखे संजयति रजः कर्मणि भारत । ज्ञानमावृत्य तु तमः प्रमादे संजयत्युत ॥ ९॥

sattvaṃ sukhe sañjayati rajaḥ karmaṇi bhārata | jñānam āvṛtya tu tamaḥ pramāde sañjayaty uta ||9||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

सत्त्वम्: सत्त्व गुण; सुखे: सुख में; संजयति: बांधता है; रजः: रजोगुण; कर्मणि: कर्म में; भारत: हे भारत; ज्ञानम्: ज्ञान को; आवृत्य: आच्छादित करके; तु: तो; तमः: तमोगुण; प्रमादे: प्रमाद में; संजयति: बांधता है; उत: भी।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

हे भारत! सत्त्व गुण सुख में बाँधता है, रजोगुण कर्म में बाँधता है, और तमोगुण ज्ञान को ढककर प्रमाद में बाँधता है।

English Translation

Sattva attaches to happiness, Rajas to action, O Bharata, while Tamas, shrouding knowledge, attaches to heedlessness.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

प्रत्येक गुण का अपना बंधन है - सत्त्व सुख में, रज कर्म में, तम प्रमाद में। Each guna binds in its own way: Sattva to happiness, Rajas to action, Tamas to delusion.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।