गुणत्रय विभाग योग (Gunatraya Vibhaga Yoga) – श्लोक 9
श्लोक ९ में तीनों गुणों के विशिष्ट बंधन बताए गए हैं: सत्त्व सुख में, रज कर्म में, तम प्रमाद में। Verse 9: Sattva binds to happiness, Rajas to action, and Tamas to heedlessness by covering knowledge.
संस्कृत श्लोक
सत्त्वं सुखे संजयति रजः कर्मणि भारत । ज्ञानमावृत्य तु तमः प्रमादे संजयत्युत ॥ ९॥
sattvaṃ sukhe sañjayati rajaḥ karmaṇi bhārata | jñānam āvṛtya tu tamaḥ pramāde sañjayaty uta ||9||
पदच्छेद / शब्दार्थ
सत्त्वम्: सत्त्व गुण; सुखे: सुख में; संजयति: बांधता है; रजः: रजोगुण; कर्मणि: कर्म में; भारत: हे भारत; ज्ञानम्: ज्ञान को; आवृत्य: आच्छादित करके; तु: तो; तमः: तमोगुण; प्रमादे: प्रमाद में; संजयति: बांधता है; उत: भी।
हिंदी अनुवाद
हे भारत! सत्त्व गुण सुख में बाँधता है, रजोगुण कर्म में बाँधता है, और तमोगुण ज्ञान को ढककर प्रमाद में बाँधता है।
English Translation
Sattva attaches to happiness, Rajas to action, O Bharata, while Tamas, shrouding knowledge, attaches to heedlessness.
टीका / Commentary
प्रत्येक गुण का अपना बंधन है - सत्त्व सुख में, रज कर्म में, तम प्रमाद में। Each guna binds in its own way: Sattva to happiness, Rajas to action, Tamas to delusion.