गुणत्रय विभाग योग (Gunatraya Vibhaga Yoga) – श्लोक 10

श्लोक १० में बताया गया है कि तीनों गुणों में से कोई एक कभी भी दूसरों को दबाकर प्रबल हो सकता है। Verse 10: Among the three gunas, one becomes dominant by subduing the others.

संस्कृत श्लोक

रजस्तमश्चाभिभूय सत्त्वं भवति भारत । रजः सत्त्वं तमश्चैव तमः सत्त्वं रजस्तथा ॥ १०॥

rajas tamaś cābhibhūya sattvaṃ bhavati bhārata | rajaḥ sattvaṃ tamaś caiva tamaḥ sattvaṃ rajas tathā ||10||

पदच्छेद / शब्दार्थ

रजः-तमः: रज और तम को; च: और; अभिभूय: अभिभूत करके; सत्त्वम्: सत्त्व गुण; भवति: होता है (बढ़ता है); भारत: हे भारत; रजः: रज; सत्त्वम्-तमः: सत्त्व और तम को; च: और; एव: ही; तमः: तम; सत्त्वम्-रजः: सत्त्व और रज को; तथा: इसी प्रकार।

हिंदी अनुवाद

हे भारत! कभी रज और तम को दबाकर सत्त्व गुण बढ़ता है, कभी सत्त्व और तम को दबाकर रजोगुण बढ़ता है, और कभी सत्त्व और रज को दबाकर तमोगुण बढ़ता है।

English Translation

Sometimes Sattva prevails, overpowering Rajas and Tamas, O Bharata; sometimes Rajas prevails over Sattva and Tamas; and at other times Tamas prevails over Sattva and Rajas.

टीका / Commentary

ये तीनों गुण परस्पर स्पर्धा करते हैं। किसी समय कोई एक प्रबल हो जाता है। The three gunas constantly compete; at any given time, one dominates the others.