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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 14 · श्लोक 11

अध्याय 14 · श्लोक 11

गुणत्रय विभाग योग (Gunatraya Vibhaga Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

सर्वद्वारेषु देहेऽस्मिन्प्रकाश उपजायते । ज्ञानं यदा तदा विद्याद्विवृद्धं सत्त्वमित्युत ॥ ११॥

sarva-dvāreṣu dehe'smin prakāśa upajāyate | jñānaṃ yadā tadā vidyād vivṛddhaṃ sattvam ity uta ||11||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

सर्वद्वारेषु: सब इंद्रियों के द्वारों में; देहे अस्मिन्: इस शरीर में; प्रकाश: प्रकाश; उपजायते: उत्पन्न होता है; ज्ञानम्: ज्ञान; यदा: जब; तदा: तब; विद्यात्: जानना चाहिए; विवृद्धम्: बढ़ा हुआ; सत्त्वम्: सत्त्व गुण; इति: इस प्रकार; उत: निश्चय ही।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

जब इस शरीर के सभी द्वारों (इंद्रियों) में प्रकाश (बुद्धि का प्रकाश) उत्पन्न होता है, तब जानना चाहिए कि सत्त्व गुण बढ़ा हुआ है।

English Translation

When through every gate of this body the light of intelligence shines, then it may be known that Sattva is predominant.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

सत्त्व के बढ़ने पर बुद्धि का प्रकाश सभी इंद्रियों में फैलता है। When Sattva increases, the light of knowledge shines through all senses.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।