गुणत्रय विभाग योग (Gunatraya Vibhaga Yoga) – श्लोक 11

श्लोक ११ में सत्त्व गुण के बढ़ने का लक्षण बताया गया है - शरीर के सभी द्वारों में ज्ञान का प्रकाश। Verse 11: When the light of knowledge shines through all the senses, it indicates the predominance of Sattva.

संस्कृत श्लोक

सर्वद्वारेषु देहेऽस्मिन्प्रकाश उपजायते । ज्ञानं यदा तदा विद्याद्विवृद्धं सत्त्वमित्युत ॥ ११॥

sarva-dvāreṣu dehe'smin prakāśa upajāyate | jñānaṃ yadā tadā vidyād vivṛddhaṃ sattvam ity uta ||11||

पदच्छेद / शब्दार्थ

सर्वद्वारेषु: सब इंद्रियों के द्वारों में; देहे अस्मिन्: इस शरीर में; प्रकाश: प्रकाश; उपजायते: उत्पन्न होता है; ज्ञानम्: ज्ञान; यदा: जब; तदा: तब; विद्यात्: जानना चाहिए; विवृद्धम्: बढ़ा हुआ; सत्त्वम्: सत्त्व गुण; इति: इस प्रकार; उत: निश्चय ही।

हिंदी अनुवाद

जब इस शरीर के सभी द्वारों (इंद्रियों) में प्रकाश (बुद्धि का प्रकाश) उत्पन्न होता है, तब जानना चाहिए कि सत्त्व गुण बढ़ा हुआ है।

English Translation

When through every gate of this body the light of intelligence shines, then it may be known that Sattva is predominant.

टीका / Commentary

सत्त्व के बढ़ने पर बुद्धि का प्रकाश सभी इंद्रियों में फैलता है। When Sattva increases, the light of knowledge shines through all senses.