आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:३१ PM | सूर्यास्त: ०५:३० AM
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 14 · श्लोक 5

अध्याय 14 · श्लोक 5

गुणत्रय विभाग योग (Gunatraya Vibhaga Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

सत्त्वं रजस्तम इति गुणाः प्रकृतिसम्भवाः । निबध्नन्ति महाबाहो देहे देहिनमव्ययम् ॥ ५॥

sattvaṃ rajas tama iti guṇāḥ prakṛti-sambhavāḥ | nibadhnanti mahā-bāho dehe dehinam avyayam ||5||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

सत्त्वम्: सत्त्व; रजः: रज; तमः: तम; इति: इस प्रकार; गुणाः: गुण; प्रकृतिसम्भवाः: प्रकृति से उत्पन्न; निबध्नन्ति: बांधते हैं; महाबाहो: हे महाबाहो; देहे: शरीर में; देहिनम्: शरीरी (आत्मा); अव्ययम्: अविनाशी।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

हे महाबाहो! सत्त्व, रज और तम - ये तीनों गुण प्रकृति से उत्पन्न होते हैं और अविनाशी देही (आत्मा) को देह से बाँधते हैं।

English Translation

Sattva, Rajas and Tama—these qualities born of Nature bind the imperishable embodied one to the body, O mighty-armed.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

यहाँ तीन गुणों का परिचय दिया गया है। ये प्रकृति के कार्य हैं और आत्मा को शरीर से आसक्त कर देते हैं। Here the three gunas are introduced. They are products of nature and bind the soul to the body.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।