गुणत्रय विभाग योग (Gunatraya Vibhaga Yoga) – श्लोक 5

श्लोक ५ में तीन गुणों (सत्त्व, रज, तम) का वर्णन है जो प्रकृति से उत्पन्न होकर आत्मा को शरीर से बाँधते हैं। Verse 5: Description of the three gunas (Sattva, Rajas, Tamas) born of nature, which bind the soul to the body.

संस्कृत श्लोक

सत्त्वं रजस्तम इति गुणाः प्रकृतिसम्भवाः । निबध्नन्ति महाबाहो देहे देहिनमव्ययम् ॥ ५॥

sattvaṃ rajas tama iti guṇāḥ prakṛti-sambhavāḥ | nibadhnanti mahā-bāho dehe dehinam avyayam ||5||

पदच्छेद / शब्दार्थ

सत्त्वम्: सत्त्व; रजः: रज; तमः: तम; इति: इस प्रकार; गुणाः: गुण; प्रकृतिसम्भवाः: प्रकृति से उत्पन्न; निबध्नन्ति: बांधते हैं; महाबाहो: हे महाबाहो; देहे: शरीर में; देहिनम्: शरीरी (आत्मा); अव्ययम्: अविनाशी।

हिंदी अनुवाद

हे महाबाहो! सत्त्व, रज और तम - ये तीनों गुण प्रकृति से उत्पन्न होते हैं और अविनाशी देही (आत्मा) को देह से बाँधते हैं।

English Translation

Sattva, Rajas and Tama—these qualities born of Nature bind the imperishable embodied one to the body, O mighty-armed.

टीका / Commentary

यहाँ तीन गुणों का परिचय दिया गया है। ये प्रकृति के कार्य हैं और आत्मा को शरीर से आसक्त कर देते हैं। Here the three gunas are introduced. They are products of nature and bind the soul to the body.