गुणत्रय विभाग योग (Gunatraya Vibhaga Yoga) – श्लोक 3
श्लोक ३ में भगवान बताते हैं कि प्रकृति (महद्ब्रह्म) उनकी योनी है, जिसमें वे जीवों के रूप में गर्भ स्थापित करते हैं। Verse 3: The Lord explains that the great Brahman (Prakriti) is His womb, and He places the germ of life in it.
संस्कृत श्लोक
मम योनिर्महद्ब्रह्म तस्मिन्गर्भं दधाम्यहम् । सम्भवः सर्वभूतानां ततो भवति भारत ॥ ३॥
mama yonir mahad-brahma tasmin garbhaṃ dadhāmy aham | sambhavaḥ sarva-bhūtānāṃ tato bhavati bhārata ||3||
पदच्छेद / शब्दार्थ
मम: मेरी; योनिः: योनी (कारण); महद्ब्रह्म: महद्ब्रह्म (मूल प्रकृति); तस्मिन्: उसमें; गर्भम्: गर्भ; दधामि: धारण करता हूँ; अहम्: मैं; सम्भवः: उत्पत्ति; सर्वभूतानाम्: सब प्राणियों की; ततः: उससे; भवति: होती है; भारत: हे भारत।
हिंदी अनुवाद
हे भारत! मेरी योनी महद्ब्रह्म (प्रकृति) है, उसमें मैं गर्भ स्थापित करता हूँ, उससे सब प्राणियों की उत्पत्ति होती है।
English Translation
My womb is the great Brahman; in that I place the germ; thence, O Bharata, is the birth of all beings.
टीका / Commentary
यहाँ महद्ब्रह्म प्रकृति है। भगवान उसमें जीवात्मा रूप गर्भ स्थापित करते हैं, फिर सब जीव उत्पन्न होते हैं। The great Brahman is the material cause, and the Lord impregnates it with the individual souls.