आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:३१ PM | सूर्यास्त: ०५:३० AM
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 14 · श्लोक 3

अध्याय 14 · श्लोक 3

गुणत्रय विभाग योग (Gunatraya Vibhaga Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

मम योनिर्महद्ब्रह्म तस्मिन्गर्भं दधाम्यहम् । सम्भवः सर्वभूतानां ततो भवति भारत ॥ ३॥

mama yonir mahad-brahma tasmin garbhaṃ dadhāmy aham | sambhavaḥ sarva-bhūtānāṃ tato bhavati bhārata ||3||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

मम: मेरी; योनिः: योनी (कारण); महद्ब्रह्म: महद्ब्रह्म (मूल प्रकृति); तस्मिन्: उसमें; गर्भम्: गर्भ; दधामि: धारण करता हूँ; अहम्: मैं; सम्भवः: उत्पत्ति; सर्वभूतानाम्: सब प्राणियों की; ततः: उससे; भवति: होती है; भारत: हे भारत।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

हे भारत! मेरी योनी महद्ब्रह्म (प्रकृति) है, उसमें मैं गर्भ स्थापित करता हूँ, उससे सब प्राणियों की उत्पत्ति होती है।

English Translation

My womb is the great Brahman; in that I place the germ; thence, O Bharata, is the birth of all beings.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

यहाँ महद्ब्रह्म प्रकृति है। भगवान उसमें जीवात्मा रूप गर्भ स्थापित करते हैं, फिर सब जीव उत्पन्न होते हैं। The great Brahman is the material cause, and the Lord impregnates it with the individual souls.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।