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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 14 · श्लोक 15

अध्याय 14 · श्लोक 15

गुणत्रय विभाग योग (Gunatraya Vibhaga Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

रजसि प्रलयं गत्वा कर्मसङ्गिषु जायते । तथा प्रलीनस्तमसि मूढयोनिषु जायते ॥ १५॥

rajasi pralayaṃ gatvā karma-saṅgiṣu jāyate | tathā pralīnas tamasi mūḍha-yoniṣu jāyate ||15||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

रजसि: रजोगुण में; प्रलयम्: मृत्यु; गत्वा: प्राप्त होकर; कर्मसङ्गिषु: कर्मों में आसक्त मनुष्यों में; जायते: जन्म लेता है; तथा: इसी प्रकार; प्रलीनः: प्रलय को प्राप्त; तमसि: तमोगुण में; मूढयोनिषु: मूढ़ योनियों में; जायते: जन्म लेता है।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

रजोगुण में मृत्यु पाकर वह कर्मों में आसक्त मनुष्यों में जन्म लेता है, और तमोगुण में मरकर मूढ़ योनियों में जन्म लेता है।

English Translation

Meeting death in Rajas, he is born among those attached to action; and dying in Tamas, he is born in the womb of the deluded.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

रज में मरने वाला कर्मलोक में जाता है; तम में मरने वाला नीच योनियों में। Death in Rajas leads to birth among those attached to action; death in Tamas leads to lower births.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।