आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:३१ PM | सूर्यास्त: ०५:३० AM
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 14 · श्लोक 14

अध्याय 14 · श्लोक 14

गुणत्रय विभाग योग (Gunatraya Vibhaga Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

यदा सत्त्वे प्रवृद्धे तु प्रलयं याति देहभृत् । तदोत्तमविदां लोकानमलान्प्रतिपद्यते ॥ १४॥

yadā sattve pravṛddhe tu pralayaṃ yāti deha-bhṛt | tadottama-vidāṃ lokān amalān pratipadyate ||14||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

यदा: जब; सत्त्वे: सत्त्व गुण में; प्रवृद्धे: बढ़े हुए; तु: तो; प्रलयम्: मृत्यु को; याति: जाता है; देहभृत्: देहधारी; तदा: तब; उत्तमविदाम्: उत्तम ज्ञानियों के; लोकान्: लोकों को; अमलान्: निर्मल; प्रतिपद्यते: प्राप्त होता है।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

जब सत्त्व गुण के बढ़े रहते हुए देहधारी की मृत्यु होती है, तब वह उत्तम ज्ञानियों के निर्मल लोकों को प्राप्त होता है।

English Translation

If the embodied one meets death when Sattva is predominant, then he attains the spotless worlds of the knowers of the Highest.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

सत्त्व के प्रबल होने पर मरने वाला उच्च लोकों में जाता है। If one dies with Sattva predominant, they go to higher, pure worlds.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।