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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 14 · श्लोक 13

अध्याय 14 · श्लोक 13

गुणत्रय विभाग योग (Gunatraya Vibhaga Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

अप्रकाशोऽप्रवृत्तिश्च प्रमादो मोह एव च । तमस्येतानि जायन्ते विवृद्धे कुरुनन्दन ॥ १३॥

aprakāśo'pravṛttiś ca pramādo moha eva ca | tamasy etāni jāyante vivṛddhe kurunandana ||13||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

अप्रकाशः: अप्रकाश (ज्ञान का अभाव); अप्रवृत्तिः: अप्रवृत्ति; च: और; प्रमादः: प्रमाद; मोहः: मोह; एव: ही; च: और; तमसि: तमोगुण में; एतानि: ये; जायन्ते: उत्पन्न होते हैं; विवृद्धे: बढ़े हुए; कुरुनन्दन: हे कुरुनन्दन।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

हे कुरुनन्दन! तमोगुण के बढ़ने पर अप्रकाश (ज्ञान का अभाव), अप्रवृत्ति, प्रमाद और मोह उत्पन्न होते हैं।

English Translation

Darkness, inertness, heedlessness and delusion—these arise when Tamas predominates, O descendant of Kuru.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

तमोगुण के लक्षण: अज्ञान, आलस्य, प्रमाद और मोह। Signs of Tamas: ignorance, inactivity, carelessness, and delusion.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।