आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:२९ PM | सूर्यास्त: ०५:३३ AM
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 12 · श्लोक 9

अध्याय 12 · श्लोक 9

भक्ति योग (Bhakti Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

अथ चित्तं समाधातुं न शक्नोषि मयि स्थिरम् । अभ्यासयोगेन ततो मामिच्छाप्तुं धनञ्जय ॥ ९॥

atha cittaṃ samādhātuṃ na śaknoṣi mayi sthiram | abhyāsa-yogena tato mām icchāptuṃ dhanañjaya ||9||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

अथ: if; चित्तम्: the mind; समाधातुम्: to fix; न: not; शक्नोषि: you are able; मयि: in Me; स्थिरम्: steadily; अभ्यास-योगेन: by practice of yoga; तत: then; माम्: Me; इच्छ: desire; आप्तुम्: to attain; धनञ्जय: O Dhananjaya.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

यदि तुम मुझमें चित्त को स्थिर रूप से नहीं लगा सकते, तो हे धनंजय, अभ्यासयोग द्वारा मुझे प्राप्त करने की इच्छा करो।

English Translation

If you are unable to fix your mind steadily on Me, then, O Dhananjaya, seek to attain Me by the yoga of practice.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

यदि कोई मन को सीधे मुझमें स्थिर नहीं कर सकता, तो उसे अभ्यासयोग (बार-बार अभ्यास) का सहारा लेना चाहिए। यह क्रमिक साधना है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।