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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 12 · श्लोक 8

अध्याय 12 · श्लोक 8

भक्ति योग (Bhakti Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

मय्येव मन आधत्स्व मयि बुद्धिं निवेशय । निवसिष्यसि मय्येव अत ऊर्ध्वं न संशयः ॥ ८॥

mayy eva mana ādhatsva mayi buddhiṃ niveśaya | nivasiṣyasi mayy eva ata ūrdhvaṃ na saṃśayaḥ ||8||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

मयि: in Me; एव: alone; मन: mind; आधत्स्व: fix; मयि: in Me; बुद्धिम्: intellect; निवेशय: place; निवसिष्यसि: you will dwell; मयि: in Me; एव: alone; अतः ऊर्ध्वम्: hereafter; न: no; संशय: doubt.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

मुझमें ही मन को लगाओ, मुझमें ही बुद्धि को लगाओ; इसके बाद तुम मुझमें ही निवास करोगे, इसमें कोई संशय नहीं।

English Translation

Fix your mind on Me alone, place your intellect in Me; thereafter you will dwell in Me alone. There is no doubt.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

भगवान अर्जुन को सीधा उपदेश देते हैं: अपने मन और बुद्धि को मुझमें स्थिर करो, फिर तुम सदा मुझमें ही रहोगे। यह सर्वोच्च साधना है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।