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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 12 · श्लोक 12

अध्याय 12 · श्लोक 12

भक्ति योग (Bhakti Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

श्रेयो हि ज्ञानमभ्यासाज्ज्ञानाद्ध्यानं विशिष्यते । ध्यानात्कर्मफलत्यागस्त्यागाच्छान्तिरनन्तरम् ॥ १२॥

śreyo hi jñānam abhyāsāj jñānād dhyānaṃ viśiṣyate | dhyānāt karma-phala-tyāgas tyāgāc chāntir anantaram ||12||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

श्रेय: better; हि: indeed; ज्ञानम्: knowledge; अभ्यासात्: than practice; ज्ञानात्: than knowledge; ध्यानम्: meditation; विशिष्यते: is superior; ध्यानात्: than meditation; कर्म-फल-त्याग: renunciation of fruits of actions; त्यागात्: from renunciation; शान्ति: peace; अनन्तरम्: immediately.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

अभ्यास से ज्ञान श्रेष्ठ है; ज्ञान से ध्यान श्रेष्ठ है; ध्यान से कर्मफल का त्याग श्रेष्ठ है; त्याग से तुरंत शांति मिलती है।

English Translation

Better indeed is knowledge than practice; than knowledge meditation is superior; than meditation renunciation of the fruits of actions is better; from renunciation peace immediately follows.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

यह श्लोक साधना के विभिन्न स्तरों की तुलना करता है। अभ्यास से ज्ञान, ज्ञान से ध्यान, ध्यान से कर्मफल त्याग श्रेष्ठ बताया गया है। परंतु यहाँ "श्रेयः" का अर्थ क्रमिक उत्कर्ष न होकर साधक की योग्यता के अनुसार उपाय है। अंततः कर्मफल त्याग से तत्काल शांति मिलती है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।