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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 12 · श्लोक 11

अध्याय 12 · श्लोक 11

भक्ति योग (Bhakti Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

अथैतदप्यशक्तोऽसि कर्तुं मद्योगमाश्रितः । सर्वकर्मफलत्यागं ततः कुरु यतात्मवान् ॥ ११॥

athaitad apy aśakto 'si kartuṃ mad-yogam āśritaḥ | sarva-karma-phala-tyāgaṃ tataḥ kuru yatātmavān ||11||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

अथ: if; एतत्: this; अपि: also; अशक्त: unable; असि: you are; कर्तुम्: to do; मत्-योगम्: to My yoga; आश्रित: taking refuge; सर्व-कर्म-फल-त्यागम्: renunciation of the fruits of all actions; ततः: then; कुरु: do; यत-आत्मवान्: with self-control.

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

यदि तुम ऐसा करने में भी असमर्थ हो, तो मेरे योग का आश्रय लेकर, समस्त कर्मों के फल का त्याग कर दो, आत्मवश होकर।

English Translation

If you are unable to do even this, then taking refuge in My yoga, renounce the fruits of all actions, with self-control.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

यदि मेरे लिए कर्म भी न कर सको तो कर्मफल त्याग का अभ्यास करो। फल की इच्छा छोड़कर, स्वयं को वश में रखते हुए कर्म करो। यह सबसे सरल उपाय है।
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।