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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 10 · श्लोक 7

अध्याय 10 · श्लोक 7

विभूति योग (Vibhuti Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

एतां विभूतिं योगं च मम यो वेत्ति तत्त्वतः | सोऽविकल्पेन योगेन युज्यते नात्र संशयः || ७||

etāṃ vibhūtiṃ yogaṃ ca mama yo vetti tattvataḥ | so ’vikalpena yogena yujyate nātra saṃśayaḥ ||7||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

एताम्: इस; विभूतिम्: विभूति को; योगम्: योग को; च: और; मम: मेरे; य: जो; वेत्ति: जानता है; तत्त्वतः: तत्व से; स: वह; अविकल्पेन: विकल्परहित (अचल); योगेन: योग से; युज्यते: युक्त हो जाता है; न: नहीं; अत्र: इसमें; संशयः: संशय।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

जो पुरुष मेरी इस विभूति और योगशक्ति को तत्व से जान लेता है, वह निश्चल योग से युक्त हो जाता है; इसमें कोई संशय नहीं है।

English Translation

He who in truth knows these manifold manifestations of My being and this Yoga power of Mine becomes established in unshakable Yoga; there is no doubt about it.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

Understanding the true nature of Krishna's divine manifestations (Vibhuti) and His Yoga power (the ability to manifest while remaining transcendent) leads to unshakable devotion. Such knowledge eliminates all doubts and establishes one firmly in the path of union with the Divine.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।