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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 10 · श्लोक 6

अध्याय 10 · श्लोक 6

विभूति योग (Vibhuti Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

महर्षयः सप्त पूर्वे चत्वारो मनवस्तथा | मद्भावा मानसा जाता येषां लोक इमाः प्रजाः || ६||

maharṣayaḥ sapta pūrve catvāro manavas tathā | mad-bhāvā mānasā jātā yeṣāṃ loka imāḥ prajāḥ ||6||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

महर्षयः: महर्षि; सप्त: सात; पूर्वे: पूर्व में; चत्वारः: चार; मनवः: मनु; तथा: भी; मद्भावा: मेरे भाव से युक्त; मानसा: मन से; जाता: उत्पन्न हुए; येषाम्: जिनसे; लोके: लोक में; इमाः: ये; प्रजाः: प्रजा।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

सात महर्षि, उनसे भी पूर्व के चार सनकादि ऋषि तथा चौदह मनु — ये सब मेरे भाव से युक्त मेरे मन से उत्पन्न हुए हैं, जिनसे संसार में यह सम्पूर्ण प्रजा उत्पन्न हुई है।

English Translation

The seven great sages, the four ancient sages before them, and the Manus also, possessed of powers like Mine, were born from My mind; from them have come these creatures in this world.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

Krishna identifies the original progenitors of humanity and spiritual knowledge as His mental creations. The seven great sages (Saptarishis), the four Kumaras (Sanaka, Sanandana, Sanatana, Sanatkumara), and the fourteen Manus are all empowered by Him to carry out creation and maintain spiritual lineage.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।