आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:२९ PM | सूर्यास्त: ०५:३३ AM
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 10 · श्लोक 5

अध्याय 10 · श्लोक 5

विभूति योग (Vibhuti Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

अहिंसा समता तुष्टिस्तपो दानं यशोऽयशः | भवन्ति भावा भूतानां मत्त एव पृथग्विधाः || ५||

ahiṃsā samatā tuṣṭis tapo dānaṃ yaśo ’yaśaḥ | bhavanti bhāvā bhūtānāṃ matta eva pṛthag-vidhāḥ ||5||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

अहिंसा: अहिंसा; समता: समता; तुष्टि: संतोष; तप: तप; दानम्: दान; यश: कीर्ति; अयश: अपकीर्ति; भवन्ति: होते हैं; भावा: भाव; भूतानाम्: प्राणियों के; मत्त: मुझसे; एव: ही; पृथग्विधा: अनेक प्रकार के।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

अहिंसा, समता, संतोष, तप, दान, कीर्ति और अपकीर्ति — इस प्रकार प्राणियों के ये सब भिन्न-भिन्न प्रकार के भाव मुझसे ही उत्पन्न होते हैं।

English Translation

Non-violence, equanimity, contentment, austerity, charity, fame, and infamy — these diverse qualities of beings arise from Me alone.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

Continuing from the previous verse, Krishna lists more qualities that originate from Him. This includes both desirable qualities like non-violence and contentment, as well as undesirable ones like infamy, showing that all dualities are part of the divine manifestation.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।