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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 10 · श्लोक 4

अध्याय 10 · श्लोक 4

विभूति योग (Vibhuti Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

बुद्धिर्ज्ञानमसम्मोहः क्षमा सत्यं दमः शमः | सुखं दुःखं भवोऽभावो भयं चाभयमेव च || ४||

buddhir jñānam asammohaḥ kṣamā satyaṃ damaḥ śamaḥ | sukhaṃ duḥkhaṃ bhavo ’bhāvo bhayaṃ cābhayam eva ca ||4||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

बुद्धि: बुद्धि; ज्ञानम्: ज्ञान; असम्मोहः: मोह का अभाव; क्षमा: क्षमा; सत्यम्: सत्य; दमः: दमन (इंद्रिय दमन); शमः: शम (मन का निग्रह); सुखम्: सुख; दुःखम्: दुःख; भवः: उत्पत्ति; अभाव: अभाव (विनाश); भयम्: भय; च: और; अभयम्: अभय; एव: ही; च: तथा।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

बुद्धि, ज्ञान, असम्मोह (मोह का अभाव), क्षमा, सत्य, इंद्रिय दमन, मनःशमन, सुख, दुःख, उत्पत्ति, विनाश, भय और अभय —

English Translation

Intellect, knowledge, non-delusion, forgiveness, truthfulness, self-restraint, tranquility, pleasure, pain, birth, death, fear, and fearlessness —

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

Krishna begins enumerating the various qualities and states that emanate from Him. All these diverse attributes—both positive and negative—have their source in the Divine. This shows that everything, whether considered good or bad, is a manifestation of the Lord’s energy.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।