आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:२९ PM | सूर्यास्त: ०५:३३ AM
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 10 · श्लोक 3

अध्याय 10 · श्लोक 3

विभूति योग (Vibhuti Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

यो मामजमनादिं च वेत्ति लोकमहेश्वरम् | असम्मूढः स मर्त्येषु सर्वपापैः प्रमुच्यते || ३||

yo mām ajam anādiṃ ca vetti loka-maheśvaram | asammūḍhaḥ sa martyeṣu sarva-pāpaiḥ pramucyate ||3||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

य: जो; माम्: मुझे; अजम्: अजन्मा; अनादिम्: अनादि; च: और; वेत्ति: जानता है; लोक-महेश्वरम्: लोकों का महान ईश्वर; असम्मूढः: मोहरहित; स: वह; मर्त्येषु: मनुष्यों में; सर्व-पापैः: सब पापों से; प्रमुच्यते: मुक्त हो जाता है।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

जो मनुष्य मुझे अजन्मा, अनादि और समस्त लोकों का महेश्वर जानता है, वह मनुष्यों में असम्मूढ़ (मोहरहित) है और सब पापों से मुक्त हो जाता है।

English Translation

He who knows Me as unborn, without beginning, and the great Lord of the worlds, he, among mortals, is undeluded and is liberated from all sins.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

Knowing Krishna as unborn, beginningless, and the supreme Lord of all worlds leads to freedom from delusion and sin. This knowledge liberates one from the bondage of material existence.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।