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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 10 · श्लोक 20

अध्याय 10 · श्लोक 20

विभूति योग (Vibhuti Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

अहमात्मा गुडाकेश सर्वभूताशयस्थितः | अहमादिश्च मध्यं च भूतानामन्त एव च || २०||

aham ātmā guḍākeśa sarva-bhūtāśaya-sthitaḥ | aham ādiś ca madhyaṃ ca bhūtānām anta eva ca ||20||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

अहम्: मैं; आत्मा: आत्मा; गुडाकेश: हे गुडाकेश (अर्जुन); सर्व-भूत-आशय-स्थित: सब प्राणियों के हृदय में स्थित; अहम्: मैं; आदि: आदि; च: और; मध्यम्: मध्य; च: और; भूतानाम्: प्राणियों का; अन्त: अन्त; एव: ही; च: भी।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

हे गुडाकेश! मैं सब प्राणियों के हृदय में स्थित आत्मा हूँ, और मैं ही सब प्राणियों का आदि, मध्य और अन्त भी हूँ।

English Translation

I am the Self, O Gudakesha, seated in the hearts of all beings; I am the beginning, the middle, and the end of all beings.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

Krishna begins His enumeration by stating the most fundamental truth: He is the inner Self (Atman) dwelling in the hearts of all beings. He is also the beginning, middle, and end of all existence — the source, sustainer, and destroyer of everything.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।