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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 10 · श्लोक 14

अध्याय 10 · श्लोक 14

विभूति योग (Vibhuti Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

सर्वमेतदृतं मन्ये यन्मां वदसि केशव | न हि ते भगवन्व्यक्तिं विदुर्देवा न दानवाः || १४||

sarvam etad ṛtaṃ manye yan māṃ vadasi keśava | na hi te bhagavan vyaktiṃ vidur devā na dānavāḥ ||14||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

सर्वम्: सब; एतत्: यह; ऋतम्: सत्य; मन्ये: मानता हूँ; यत्: जो; माम्: मुझसे; वदसि: कहते हो; केशव: हे केशव; न: नहीं; हि: ही; ते: आपकी; भगवन्: हे भगवन्; व्यक्तिम्: प्रकट स्वरूप को; विदु: जानते हैं; देवा: देवता; न: न; दानवाः: दानव।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

हे केशव! आप मुझसे जो कुछ कहते हैं, वह सब मैं सत्य मानता हूँ। हे भगवन्! आपके प्रकट स्वरूप को न तो देवता जानते हैं और न दानव ही।

English Translation

I believe all this that You tell me to be true, O Keshava; indeed, O Lord, neither the gods nor the demons comprehend Your manifestation.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

Arjuna expresses his complete faith in Krishna's words. He acknowledges that the divine nature of the Lord is incomprehensible even to celestial beings and demons. Only by Krishna's grace can one understand His true manifestation.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।