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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 10 · श्लोक 13

अध्याय 10 · श्लोक 13

विभूति योग (Vibhuti Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

आहुस्त्वामृषयः सर्वे देवर्षिर्नारदस्तथा | असितो देवलो व्यासः स्वयं चैव ब्रवीषि मे || १३||

āhus tvām ṛṣayaḥ sarve devarṣir nāradas tathā | asito devalo vyāsaḥ svayaṃ caiva bravīṣi me ||13||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

आहु: कहते हैं; त्वाम्: आपको; ऋषयः: ऋषि; सर्वे: सभी; देवर्षि: देवर्षि; नारद: नारद; तथा: तथा; असित: असित; देवल: देवल; व्यास: व्यास; स्वयम्: स्वयं; च: और; एव: ही; ब्रवीषि: कहते हैं; मे: मुझसे।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

सभी ऋषि, देवर्षि नारद, असित, देवल और व्यास भी आपको ऐसा ही कहते हैं, और अब स्वयं आप भी मुझसे यही कह रहे हैं।

English Translation

All the sages have thus declared You, as also the divine sage Narada; so also Asita, Devala, and Vyasa; and now You Yourself say it to me.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

Arjuna supports his declaration of Krishna's divinity by citing the testimony of great sages and authorities. Narada, Asita, Devala, and Vyasa — all have confirmed the same truth. Now Krishna Himself has revealed it directly to Arjuna, confirming the一致 of all authentic spiritual authorities.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।