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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 10 · श्लोक 12

अध्याय 10 · श्लोक 12

विभूति योग (Vibhuti Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

अर्जुन उवाच | परं ब्रह्म परं धाम पवित्रं परमं भवान् | पुरुषं शाश्वतं दिव्यमादिदेवमजं विभुम् || १२||

arjuna uvāca | paraṃ brahma paraṃ dhāma pavitraṃ paramaṃ bhavān | puruṣaṃ śāśvataṃ divyam ādi-devam ajaṃ vibhum ||12||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

अर्जुन उवाच: अर्जुन बोले; परम्: परम; ब्रह्म: ब्रह्म; परम्: परम; धाम: धाम; पवित्रम्: पवित्र; परमम्: परम; भवान्: आप; पुरुषम्: पुरुष; शाश्वतम्: शाश्वत; दिव्यम्: दिव्य; आदि-देवम्: आदिदेव; अजम्: अजन्मा; विभुम्: विभु (सर्वव्यापी)।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

अर्जुन बोले: आप परम ब्रह्म हैं, परम धाम हैं, परम पवित्र हैं, शाश्वत दिव्य पुरुष हैं, आदिदेव हैं, अजन्मा हैं और सर्वव्यापी हैं।

English Translation

Arjuna said: You are the Supreme Brahman, the supreme abode, the supreme purifier, eternal, divine Person, the primeval God, unborn, and omnipresent.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

After hearing Krishna's descriptions of His glories, Arjuna responds with profound reverence. He acknowledges Krishna as the Supreme Brahman — the ultimate reality itself. This is a significant declaration where Arjuna, as a devotee, affirms Krishna's divinity using the highest philosophical terms from the Vedas and Upanishads.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।