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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 10 · श्लोक 11

अध्याय 10 · श्लोक 11

विभूति योग (Vibhuti Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

तेषामेवानुकम्पार्थमहमज्ञानजं तमः | नाशयाम्यात्मभावस्थो ज्ञानदीपेन भास्वता || ११||

teṣām evānukampārtham aham ajñāna-jaṃ tamaḥ | nāśayāmy ātma-bhāva-stho jñāna-dīpena bhāsvatā ||11||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

तेषाम्: उनके; एव: ही; अनुकम्पा-अर्थम्: अनुकम्पा के लिए; अहम्: मैं; अज्ञान-जम्: अज्ञान से उत्पन्न; तमः: अंधकार; नाशयामि: नष्ट करता हूँ; आत्म-भाव-स्थ: उनके हृदय में स्थित; ज्ञान-दीपेन: ज्ञान के दीपक से; भास्वता: प्रकाशमान।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

उन भक्तों पर अनुग्रह करने के लिए मैं स्वयं उनके हृदय में स्थित होकर उनके अज्ञानजनित अंधकार को ज्ञान के प्रकाशमान दीपक द्वारा नष्ट कर देता हूँ।

English Translation

Out of mere compassion for them, I, dwelling in their hearts, destroy the darkness born of ignorance with the shining lamp of knowledge.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

This verse beautifully describes the Lord's compassion. He personally dwells in the hearts of His devotees and, out of His grace, illuminates their consciousness with the light of knowledge, dispelling the darkness of ignorance. This is the culmination of the devotee's journey — direct divine intervention for spiritual enlightenment.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।