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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 10 · श्लोक 10

अध्याय 10 · श्लोक 10

विभूति योग (Vibhuti Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

तेषां सततयुक्तानां भजतां प्रीतिपूर्वकम् | ददामि बुद्धियोगं तं येन मामुपयान्ति ते || १०||

teṣāṃ satata-yuktānāṃ bhajatāṃ prīti-pūrvakam | dadāmi buddhi-yogaṃ taṃ yena mām upayānti te ||10||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

तेषाम्: उनको; सतत-युक्तानाम्: निरन्तर युक्त (लगे हुए); भजताम्: भजने वालों को; प्रीति-पूर्वकम्: प्रीतिपूर्वक; ददामि: देता हूँ; बुद्धि-योगम्: बुद्धि-योग; तम्: वह; येन: जिससे; माम्: मुझको; उपयान्ति: प्राप्त होते हैं; ते: वे।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

उन निरन्तर मुझमें लगे हुए और प्रेमपूर्वक भजने वाले भक्तों को मैं वह बुद्धियोग प्रदान करता हूँ, जिससे वे मुझको प्राप्त होते हैं।

English Translation

To those who are constantly devoted to serving Me with love, I give the understanding by which they can come to Me.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

Krishna promises special divine grace to His loving devotees. To those who worship Him constantly with love, He grants "buddhi yoga" — the divine wisdom and inner guidance that leads them ultimately to Him. This is not intellectual knowledge but spiritual illumination.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।