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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 · श्लोक 8

अध्याय 1 · श्लोक 8

अर्जुन विषाद योग (Arjuna Vishada Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

भवान्भीष्मश्च कर्णश्च कृपश्च समितिञ्जयः | अश्वत्थामा विकर्णश्च सौमदत्तिस्तथैव च ||८||

bhavānbhīṣmaśca karṇaśca kṛpaśca samitiñjayaḥ | aśvatthāmā vikarṇaśca saumadattistathaiva ca ||8||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

भवान्: आप; भीष्म: भीष्म; च: और; कर्ण: कर्ण; च: और; कृप: कृपाचार्य; च: और; समितिञ्जय: युद्ध में सदा विजयी; अश्वत्थामा: अश्वत्थामा; विकर्ण: विकर्ण; च: और; सौमदत्ति: सोमदत्त के पुत्र (भूरिश्रवा); तथा: तथा; एव: ही; च: और।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

आप (द्रोणाचार्य), भीष्म, कर्ण, युद्ध में सदा विजयी कृपाचार्य, अश्वत्थामा, विकर्ण और सोमदत्त के पुत्र भूरिश्रवा – ये सभी हैं।

English Translation

There are personalities like yourself, Bhishma, Karna, Kripa who are always victorious in battle, Ashvatthama, Vikarna, and the son of Somadatta (Bhurishrava).

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

दुर्योधन ने सर्वप्रथम अपने गुरु द्रोण का नाम लिया, फिर भीष्म पितामह, कर्ण, कृपाचार्य, अश्वत्थामा, विकर्ण और भूरिश्रवा। Duryodhana lists the most powerful warriors on his side, starting with Drona and Bhishma.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।