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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 · श्लोक 7

अध्याय 1 · श्लोक 7

अर्जुन विषाद योग (Arjuna Vishada Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

अस्माकं तु विशिष्टा ये तान्निबोध द्विजोत्तम | नायका मम सैन्यस्य संज्ञार्थं तान्ब्रवीमि ते ||७||

asmākaṃ tu viśiṣṭā ye tānnibodha dvijottama | nāyakā mama sainyasya saṃjñārthaṃ tānbravīmi te ||7||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

अस्माकम्: हमारी ओर; तु: तो; विशिष्टा: विशेष; ये: जो; तान्: उन्हें; निबोध: जानो; द्विजोत्तम: हे द्विजश्रेष्ठ; नायका: नायक; मम: मेरी; सैन्यस्य: सेना के; संज्ञार्थम्: सूचना के लिए; तान्: उन्हें; ब्रवीमि: बताता हूँ; ते: आपको।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

किन्तु हे द्विजश्रेष्ठ! आपकी जानकारी के लिए मैं अपनी सेना के जो विशेष नायक हैं, उन्हें बताता हूँ।

English Translation

But for your information, O best of the twice-born, let me tell you about the distinguished commanders who are especially qualified to lead my army.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

दुर्योधन अब अपनी सेना के प्रमुख योद्धाओं का परिचय देता है, यह दिखाने के लिए कि उसकी सेना भी कम शक्तिशाली नहीं है। Duryodhana now lists the key warriors on his own side to boost morale.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।