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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 · श्लोक 40

अध्याय 1 · श्लोक 40

अर्जुन विषाद योग (Arjuna Vishada Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

कुलक्षये प्रणश्यन्ति कुलधर्माः सनातनाः | धर्मे नष्टे कुलं कृत्स्नमधर्मोऽभिभवत्युत ||४०||

kulakṣaye praṇaśyanti kuladharmāḥ sanātanāḥ | dharme naṣṭe kulaṃ kṛtsnamadharmo'bhibhavatyuta ||40||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

कुलक्षये: कुल के नाश होने पर; प्रणश्यन्ति: नष्ट हो जाते हैं; कुलधर्माः: कुल के धर्म; सनातनाः: सनातन; धर्मे: धर्म के; नष्टे: नष्ट होने पर; कुलम्: कुल; कृत्स्नम्: सम्पूर्ण; अधर्मः: अधर्म; अभिभवति: प्रबल हो जाता है; उत: भी।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

कुल के नाश होने पर सनातन कुलधर्म नष्ट हो जाते हैं। धर्म के नष्ट होने पर सम्पूर्ण कुल में अधर्म प्रबल हो जाता है।

English Translation

When the family is destroyed, the eternal family traditions are lost. With the destruction of dharma, adharma overtakes the entire family.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

अर्जुन अब कुलक्षय के दुष्परिणाम बता रहे हैं – धर्म का नाश और अधर्म का उदय। Arjuna now explains the consequences of destroying the family – loss of dharma and rise of adharma.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।