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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 · श्लोक 41

अध्याय 1 · श्लोक 41

अर्जुन विषाद योग (Arjuna Vishada Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

अधर्माभिभवात्कृष्ण प्रदुष्यन्ति कुलस्त्रियः | स्त्रीषु दुष्टासु वार्ष्णेय जायते वर्णसङ्करः ||४१||

adharmābhibhavātkṛṣṇa praduṣyanti kulastriyaḥ | strīṣu duṣṭāsu vārṣṇeya jāyate varṇasaṅkaraḥ ||41||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

अधर्म: अधर्म; अभिभवात्: के प्रबल होने से; कृष्ण: हे कृष्ण; प्रदुष्यन्ति: भ्रष्ट हो जाती हैं; कुलस्त्रियः: कुल की स्त्रियाँ; स्त्रीषु: स्त्रियों के; दुष्टासु: भ्रष्ट होने पर; वार्ष्णेय: हे वार्ष्णेय (कृष्ण); जायते: उत्पन्न होता है; वर्णसङ्कर: वर्णसंकर (अवांछित संतान)।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

हे कृष्ण! अधर्म के प्रबल होने पर कुल की स्त्रियाँ भ्रष्ट हो जाती हैं। हे वार्ष्णेय! स्त्रियों के भ्रष्ट होने पर वर्णसंकर (अवांछित संतान) उत्पन्न होती है।

English Translation

When adharma predominates, O Krishna, the women of the family become corrupt. When women are corrupted, O Varshneya, unwanted progeny are born.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

अर्जुन कुलक्षय के दूरगामी परिणाम बता रहे हैं – स्त्रियों का भ्रष्ट होना और वर्णसंकर का जन्म। Arjuna explains further consequences – corruption of women and birth of unwanted progeny.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।