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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 · श्लोक 39

अध्याय 1 · श्लोक 39

अर्जुन विषाद योग (Arjuna Vishada Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

कथं न ज्ञेयमस्माभिः पापादस्मान्निवर्तितुम् | कुलक्षयकृतं दोषं प्रपश्यद्भिर्जनार्दन ||३९||

kathaṃ na jñeyamasmābhiḥ pāpādasmānnivartitum | kulakṣayakṛtaṃ doṣaṃ prapaśyadbhirjanārdana ||39||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

कथम्: कैसे; न: नहीं; ज्ञेयम्: जानना चाहिए; अस्माभिः: हमें; पापात्: पाप से; अस्मात्: इससे; निवर्तितुम्: हटने के लिए; कुलक्षयकृतम्: कुल के विनाश से उत्पन्न; दोषम्: दोष को; प्रपश्यद्भिः: देखते हुए; जनार्दन: हे जनार्दन।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

हे जनार्दन! जो लोग कुलक्षय से उत्पन्न दोष को देख रहे हैं, उन्हें इस पाप से हटने के लिए क्यों नहीं जानना चाहिए?

English Translation

O Janardana, why should we not learn to turn away from this sin, we who can clearly see the evil of destroying the family?

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

अर्जुन कहते हैं कि जो लोग कुलक्षय के दोष को समझते हैं, उन्हें पाप से बचना चाहिए। Arjuna says that those who understand the evil of destroying the family should avoid sin.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।