आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:३० PM | सूर्यास्त: ०५:३१ AM
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 · श्लोक 38

अध्याय 1 · श्लोक 38

अर्जुन विषाद योग (Arjuna Vishada Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

यद्यप्येते न पश्यन्ति लोभोपहतचेतसः | कुलक्षयकृतं दोषं मित्रद्रोहे च पातकम् ||३८||

yadyapyete na paśyanti lobhopahatacetasaḥ | kulakṣayakṛtaṃ doṣaṃ mitradrohe ca pātakam ||38||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

यद्यपि: यद्यपि; एते: ये; न: नहीं; पश्यन्ति: देखते हैं; लोभ: लोभ से; उपहत: ग्रस्त; चेतसः: चित्त वाले; कुलक्षयकृतम्: कुल के विनाश से होने वाले; दोषम्: दोष को; मित्रद्रोहे: मित्रों से द्रोह में; च: और; पातकम्: पातक को।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

यद्यपि लोभ से ग्रस्त चित्त वाले ये (धृतराष्ट्र के पुत्र) कुल के विनाश से होने वाले दोष को और मित्रों से द्रोह रूपी पातक को नहीं देखते, ...

English Translation

Although they, whose minds are overpowered by greed, see no evil in destroying the family or in hostility toward friends, ...

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

अर्जुन कहते हैं कि दुर्योधन आदि लोभवश कुलक्षय के दोष को नहीं समझते, पर हम तो समझते हैं। Arjuna says that although Duryodhana et al. do not see the evil of destroying the family, we do.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।