आज का पंचांग (Columbus) | सूर्योदय: ०४:३० PM | सूर्यास्त: ०५:३१ AM
श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 · श्लोक 37

अध्याय 1 · श्लोक 37

अर्जुन विषाद योग (Arjuna Vishada Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

तस्मान्नार्हा वयं हन्तुं धार्तराष्ट्रान्स्वबान्धवान् | स्वजनं हि कथं हत्वा सुखिनः स्याम माधव ||३७||

tasmānnārhā vayaṃ hantuṃ dhārtarāṣṭrānsvabāndhavān | svajanaṃ hi kathaṃ hatvā sukhinaḥ syāma mādhava ||37||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

तस्मात्: इसलिए; न: नहीं; अर्हाः: योग्य; वयम्: हम; हन्तुम्: मारने के; धार्तराष्ट्रान्: धृतराष्ट्र के पुत्रों को; स्वबान्धवान्: अपने बांधव; स्वजनम्: स्वजनों को; हि: निश्चय ही; कथम्: कैसे; हत्वा: मारकर; सुखिनः: सुखी; स्याम: होंगे; माधव: हे माधव (कृष्ण)।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

अतएव हे माधव! हम अपने बांधव धृतराष्ट्र के पुत्रों को मारने के योग्य नहीं हैं। अपने स्वजनों को मारकर हम सुखी कैसे हो सकते हैं?

English Translation

Therefore, O Madhava, we have no right to kill the sons of Dhritarashtra, our own relatives. How can we be happy after killing our own kinsmen?

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

अर्जुन पुनः तर्क देते हैं कि अपने ही लोगों को मारकर सुखी होना संभव नहीं। Arjuna reiterates that happiness cannot come from killing one's own kin.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।