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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 · श्लोक 36

अध्याय 1 · श्लोक 36

अर्जुन विषाद योग (Arjuna Vishada Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

निहत्य धार्तराष्ट्रान्नः का प्रीतिः स्याज्जनार्दन | पापमेवाश्रयेदस्मान्हत्वैतानाततायिनः ||३६||

nihatya dhārtarāṣṭrānnaḥ kā prītiḥ syājjanārdana | pāpamevāśrayedasmānhatvaitānātatāyinaḥ ||36||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

निहत्य: मारकर; धार्तराष्ट्रान्: धृतराष्ट्र के पुत्रों को; नः: हमें; का: क्या; प्रीतिः: प्रसन्नता; स्यात्: होगी; जनार्दन: हे जनार्दन (कृष्ण); पापम्: पाप; एव: ही; आश्रयेत्: प्राप्त होगा; अस्मान्: हमें; हत्वा: मारकर; एतान्: इन; आततायिनः: आततायियों को।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

हे जनार्दन! धृतराष्ट्र के पुत्रों को मारकर हमें क्या प्रसन्नता होगी? इन आततायियों को मारने पर भी हमें पाप ही लगेगा।

English Translation

O Janardana, what pleasure will we derive from killing the sons of Dhritarashtra? Sin will only overtake us if we slay these aggressors.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

अर्जुन का तर्क है कि यदि वे आततायी (अत्याचारी) दुर्योधन आदि को भी मारेंगे, तो उन्हें पाप ही लगेगा क्योंकि वे भी अपने हैं। Arjuna argues that even killing aggressors who are relatives brings sin.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।