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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 · श्लोक 4

अध्याय 1 · श्लोक 4

अर्जुन विषाद योग (Arjuna Vishada Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

अत्र शूरा महेष्वासा भीमार्जुनसमा युधि | युयुधानो विराटश्च द्रुपदश्च महारथः ||४||

atra śūrā maheṣvāsā bhīmārjunasamā yudhi | yuyudhāno virāṭaśca drupadaśca mahārathaḥ ||4||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

अत्र: यहाँ; शूरा: वीर; महेष्वासा: महान धनुर्धर; भीमार्जुनसमा: भीम और अर्जुन के समान; युधि: युद्ध में; युयुधान: सात्यकि; विराट: राजा विराट; च: और; द्रुपद: द्रुपद; च: भी; महारथः: महारथी।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

इस सेना में भीम और अर्जुन के समान युद्ध करने वाले महान धनुर्धर वीर हैं – युयुधान (सात्यकि), विराट और महारथी द्रुपद।

English Translation

Here in this army are many heroic warriors, mighty archers equal in battle to Bhima and Arjuna: great fighters like Yuyudhana, Virata, and Drupada.

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

दुर्योधन पाण्डव पक्ष के प्रमुख योद्धाओं के नाम गिना रहा है, जिससे द्रोण को यह अहसास हो कि युद्ध आसान नहीं होगा। Duryodhana lists the prominent warriors on the Pandava side to emphasize the challenge.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।