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श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 1 · श्लोक 3

अध्याय 1 · श्लोक 3

अर्जुन विषाद योग (Arjuna Vishada Yoga) का पावन श्लोक तथा उसका विस्तृत हिंदी व अंग्रेजी अनुवाद एवं व्याख्या।

अंतिम अपडेट: 15 फरवरी, 2026

१. मूल संस्कृत श्लोक (Sanskrit Verse)

पश्यैतां पाण्डुपुत्राणामाचार्य महतीं चमूम् | व्यूढां द्रुपदपुत्रेण तव शिष्येण धीमता ||३||

paśyaitāṃ pāṇḍuputrāṇāmācārya mahatīṃ camūm | vyūḍhāṃ drupadaputreṇa tava śiṣyeṇa dhīmatā ||3||

२. पदच्छेद एवं शब्दार्थ (Word Meanings)

पश्य: देखिए; एताम्: इस; पाण्डुपुत्राणाम्: पाण्डुपुत्रों की; आचार्य: हे आचार्य; महतीम्: महान; चमूम्: सेना को; व्यूढाम्: व्यूहबद्ध; द्रुपदपुत्रेण: द्रुपद के पुत्र (धृष्टद्युम्न) द्वारा; तव: आपके; शिष्येण: शिष्य; धीमता: बुद्धिमान।

३. श्लोक का अनुवाद (Verse Translation)

हिंदी अनुवाद

हे आचार्य! आपके बुद्धिमान शिष्य द्रुपदपुत्र (धृष्टद्युम्न) द्वारा व्यूहबद्ध पाण्डुपुत्रों की इस विशाल सेना को देखिए।

English Translation

O Teacher, behold this great army of the sons of Pandu, arrayed for battle by the son of Drupada, your wise disciple!

४. विस्तृत व्याख्या एवं भावार्थ (Commentary)

दुर्योधन यहाँ द्रोणाचार्य की भावनाओं को भड़काने का प्रयास कर रहा है, क्योंकि धृष्टद्युम्न द्रोण के शत्रु द्रुपद का पुत्र है। Duryodhana subtly reminds Drona that his own disciple is fighting against him.
श्रीराम शास्त्री
शोधकर्ता व लेखक

श्रीराम शास्त्री

वैदिक संस्कृत और दार्शनिक साहित्य के व्याख्याता। सनातन इतिहास और प्राचीन ग्रंथों पर अनुसंधान का १०+ वर्षों का अनुभव।

आचार्य देवदत्त द्विवेदी
संपादकीय समीक्षा

आचार्य देवदत्त द्विवेदी

संस्कृत विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक एवं वैदिक शास्त्र विशेषज्ञ। भक्तिलोक की समस्त सामग्री के आध्यात्मिक सत्यता निरीक्षक।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ।।